निंदनीय क्या, संसार या अज्ञान?
अनित्यं सर्वमेवेदं तापत्रयदूषितं।
असारं निन्दितं हेयमि ति निश्चित्य शाम्यति॥९- ३॥
अनुवाद: यह सब अनित्य है, तीन प्रकार के कष्टों (दैहिक, दैविक और भौतिक) से घिरा है, सारहीन है, निंदनीय है, त्याग करने योग्य है, ऐसा निश्चित करके ही शांति प्राप्त होती है।
~ अष्टावक्र गीता ( अध्याय - ९, श्लोक… read_more