ममत्वबुद्धिरहित माने क्या? || (2020)
कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि।
योगिनः कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वाऽऽत्मशुद्धये।।
कर्मयोगी ममत्वबुद्धिरहित केवल इन्द्रिय, मन, बुद्धि और शरीर द्वारा भी आसक्ति को त्याग कर अन्तःकरण की शुध्दि के लिए कर्म करते हैं।
—श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ५, श्लोक ११
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। कृष्ण जी कह रहे हैं, "कर्मयोगी ममत्वबुद्धिरहित केवल इन्द्रिय, मन,… read_more