काम क्रोध माध मद- इन सबसे भी बड़ी एक समस्या
कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन्।
इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते।।
भावार्थ: जो मनुष्य कर्मेन्द्रियों को तो वश में करता है, किंतु मन से इंद्रियों के विषयों का चिंतन करता रहता है, ऐसा मूर्ख जीव मिथ्याचारी कहलाता है।
(श्रीमद्भागवत गीता अध्याय ३, श्लोक ६)
प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, क्या मानसिक विकारों और… read_more